वर्तमान युग में सभी क्षेत्रों में प्रगति करते समय हो रही स्पर्धा एवं संघर्षमय जीवन से जो अहंकार ईर्ष्या और अंह भाव से भरा है | ऊबकर एक व्यक्ति के मन में मन शांति तथा संतोषमय जीवन व्यतीत करने की तीव्र उत्कृष्ता जाग्रत हुई और वह एक बड़े पंडित के पास गया तथा अपने मन की दुविधा प्रकट करते हुए मन शांति एवं समाधान प्राप्त करने का मार्ग पूछने लगा |
पंडित जी ने कहा की संस्कार की नश्वर वस्तुओ को प्राप्त करने की इक्छा से मन हटाकर, शाश्वत एवं चिरंतन शांति देने वाले परमसत्य को प्राप्त करने की दिशा में मन को ले जाओ और इसके लिए श्रेष्ठ आध्यात्मिक ग्रंथो का अभ्यास करो |
गीता ग्रन्थ
मुख्यता गीता ग्रन्थ जो सभी ग्रंथो का सार है, उसका मनन करो सन्मार्ग पर चलते रहो, अपना गृहस्थ सुचारु रूप से निभाते हुए अपना व्यबसाये नेकी से करो और मानव सेवा को ईश्वर सेवा मान कर चलो | इससे तुम्हारी मनोकामना सफल होगी उन्ही के आदेश को शिरोधाये मान कर उसने अपना जीवन क्रम वैसा ही बनाया |
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ग्रंथों का मनन करने पर उसे लगा कि जीवन मृत्यु के फेरे से छुटकारा पाकर अखंड आनंद, मुक्ति को प्राप्त करना यही मानव जीवन का उद्देश्य होना चाहिए |
मुक्ति का मार्ग
यह ज्ञान होने पर उसे मुक्ति का मार्ग बताने वाले कोई पहुंचे हुए संत का मार्ग दर्शन पाने की उत्कृष्ट जाग उठी और भाग्य से उसे ऐसे ही एक पहुंचे हुए संत का सनन्ध प्राप्त हुआ, जो उस परम सत्य तक पहुंचे हुए थे |
उनके संध्याय में रहकर, वह उनका कृपा पात्र बना और जिज्ञासु होकर विनम्र भाग से जीवन में मुक्ति पाने का मार्ग बताने की थी कि उसकी जिज्ञासा को जानकर उन्होंने कहा कि - जिस मार्ग पर तुम चल रहे हो, उस पर निष्ठा से चलते रहो |
कहानी
कुछ आगे बढ़ने पर तुम्हें संयम का मार्ग मिलेगा और आगे समझदारी की एक छोटी सी मिलेगी उसके आगे मार्ग के दोनों ओर प्रलोभन की सजी हुई दुकानें दृष्टिगत होंगी तथा आगे जाकर माया का चौराहा मिलेगा एवं उसके आगे अंधश्रद्धा का एक बड़ा बाजार मिलेगा |
किंतु तुम उधर की ओर आगे ना बढ़ कर पहले जो समझदारी की गली मिलती है उसी में प्रवेश करना, उसे पार करने के पश्चात, तुम्हें वैराग्य का एक टेढ़ा मेरा मार्ग मिलेगा और आगे बढ़ने पर ज्ञान मंदिर नाम की एक सुंदर वस्तु दृष्टिगत होगी |
उसके कुछ आगे आध्यात्म नाम का एक महल मिलेगा | वहां पहुंचने पर महल के ठेकेदारों के पहरी, उस महल में प्रवेश करने से तुम्हें रुकेंगे उन्हें समर्पण का प्रमाण पत्र दिखाकर तुम आगे बढ़ जाना |
कुछ समय चलने पर तुम्हें 4 भव्य दिव्य भवन दृष्टिगत होंगे | जिनका नाम है बखरी, मध्यमा, पारा और पस्च्यंति चारो भवन अति सुंदर है, किंतु तुम भी उन्हीं में से परम नाम भवन में प्रवेश करना है |
उसकी दूसरी मंजिल पर स्वाद नंद का एक कक्ष है ,उसके द्वार पर पहुंचने पर शरणागति की घंटी बजाना कृपा का द्वार अपने आप खुल जाएगा |
अंदर प्रवेश करने पर ध्यान का एक दिव्य आसन दिखेगा, उस पर समर्पण भाव से ध्यान मग्न होकर धान बंद हो जाना और परम तत्व का चिंतन करने रहना समाधान की थाली में शांति रस का कुंभ लेकर मुक्ति तुम्हारे स्वागत में खड़ी मिलेगी |
निष्कर्ष
जीवन मरण कि व्याधि से छूटकर शाश्वत, आनंद की अनुभूति प्राप्त करने के लिए यह एक सीधा मार्ग है | वहां पर पहुंचना सरल नहीं है, तुम्हारी जीवन जन्म जन्मांतर के पुण्य एवं जगत नियंता की कृपा दृष्टि से यह संभव हो सकता है |
यह सुनकर वह भाव विभोर हो गया और उस चैतन्य में साधु पुरुष के सामने नमस्कार कुकर उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लेकर आगे बढ़ गया | उसके मन की सभी सुविधाएं समाप्त होकर उसे परम आनंद की अनुभूति हुई प्रत्येक मानव को उससे बोल देना चाहिए और अपना जीवन सुखमय एवं सफल बनाना चाहिए क्योंकि मानव जीवन की सफलता का यही राजमार्ग है |
