आपतियाँ एवं कठिनाईआं जीवन का स्वाभाविक अंग है, जो धूप छाँह एवं दिन रात की भांति हमारे जीवन में आती जाती रहती है | लेकिन जब भी आती है तो हम इनका सामना कैसे करते हैं, इनसे कैसे निभाते हैं, इनके प्रति हमारी प्रतिक्रिया कैसे रहती है इसके आधार पर हमारे जीवन की दशा और दिशा निर्धारित होती है |
यदि हम सजक जिज्ञासु की भांति धैर्य एवं साहस के साथ इनका सामना करते हैं, इनसे आवश्यक सबक लेते हुए आगे बढ़ते हैं तो जीवन के एक विकेट पर हमें जीवन जीने की कला का महत्व पूर्ण शिक्षा देकर जाते हैं | अन्यथा ये हमे तोड़कर जीवन मे कटुता का समावेश कर अस्तित्व के तार को और उलझाकर जाते है |
सामान्य क्रम मे आपत्तियों के आने पर व्यक्ति घबरा जाता है, उसके हाँथ पैर फूल जाते है, कई तो रोना धोना तक शुरू कर देते है | लगता है कि भगवान ने हमारे ऊपर यह कैसी बिजली गिरा डाली व्यक्ति अपना होश खो बैठता है और इनसे बचने या इनको टालने का यथा संभव प्रयास करता है |
लेकिन जब ये चली जाती है और इनका समय बीत जाता है, तो फिर इन्ही को याद करके व्यक्ति हस्ता है | इनकी कथा गाथाओं को व अपने साहस के किस्से को बड़े मनोरंजन के साथ आनंद लेते हुए अपने मित्र दोस्तों, नाती-पोतो के बीच सुनाता है |
व्यक्ति का आशंकित मन
वास्तव में किसी भी आपत्ति के आने पर व्यक्ति का आशंकित मन अपने स्वभाव के अनुरूप चीजों को बढ़ा चढ़ाकर देखने लगता है यदि व्यक्ति अस्पताल में भर्ती है | आशंकित मन छोटी सी बीमारी या किसी अन्य कल्पना का जाल बुनने शुरू कर देता है बुरे से बुरे विकल्पों के बीच मन झूलने लगता है |
कल्पना की इस उड़ान को आसपास के रोगी हवा दे जाते हैं, जो किसी तरह की पीड़ा से कराह रहे होते हैं ऐसे में व्यक्ति का मन की भयंकर विचारों में उलझ जाता है कि पता नहीं कहीं मेरे साथ भी ऐसा ही कुछ ना होने वाला हो |
सब कुछ चिकित्सक के हाथों में वह उनकी पूरी देखरेख में चल रहा होता है, इधर-उधर ध्यान देने के बजाय यदि जितना कहा गया है उतना ही करा जाता अपने स्वास्थ्य पर ध्यान केंद्रित रखते तो कुछ और बात होती इसकी वजह आशंकित मन बेसिर पैर की उल जलूल कल्पनाओं में उलझ जाता है |
जो अपने हाथ नकारात्मक विचारों का पूरा अंदर लेकर आती है जिन को थामना मुश्किल हो जाता है ऐसे मे व्यक्ति एवं उद्गीनता से इतना चिंतातुर हो जाता है कि ऐसी बीमारी न होने पर भी कल्पित बीमारी के लक्षण प्रकट होने शुरू हो जाते है |
आध्यात्मिक विकास
ऐसा ही अन्य किसी विपरीत परिस्थिति अपत्ति एवं कठिनाई भरे पलों में होता है, जबकि यदि व्यक्ति सकारात्मक विचारों के साथ धैर्य का दामन थाम ते हुए वर्तमान में जी रहा होता अपना श्रेष्तम प्रयास करते हुए बुरी से बुरी परिस्थिति के लिए तैयार रहता तो पाता कि आशंकित मन स्थिति की नब्बे फीसदी कल्पनाये आधारहीन थी जिनमे हम व्यर्थ ही अपना समय स्वास्थ्य एवं मनोयोग गवाते रहे |
वास्तव में कठिनाइयों एवं आपत्तियों के प्रति हमें हमारी सोच बदलने की आवश्यकता है हमारे जीवन में कठिनाइयां हमारे आध्यात्मिक विकास के लिए आती है यह हमारा पारबंध काटती है और हमारे संचित कर्मों का बोझ हल्का कर हमारे जीवन को और भी बेहतर बनाती हैं |
इनके साथ हमारे संचित पापों का भार हल्का होने के साथ हमारी अंत्य चेतना शुद्ध एवं निर्मल हो जाती है | इसके साथ ही हमारी अंत शक्तियों का जागरण भी होता है जो सामान्य परिस्थितियों में तंद्राववस्था में रहती हैं कठिन समय इनझोरकर हमारी उन्नति में इनका सहायक बनता है | इस तरह ये एक बेहतर से ईश्वर की ओर से उपहार स्वरूप होती हैं जो हमारी बेहोशी अज्ञानता आलस्य अहंकार जड़ता है और व्य्मो को नष्ट करने आती है |
दुख व कष्ट
वास्तव में दुख व कष्ट एक तरह के हंटर का काम करते हैं, जो हमारी शिथिल पड़ी शारीरिक एवं मानसिक शक्तियों को भड़का कर हमें क्रियाशील बनाते हैं और साथ ही हमें धर्म आचरण की शिक्षा देकर सही राह पर चलना सिखाते हैं |
कठिनाइयों में अपने धैर्य व संतुलन को खोलने के बजाय साहस पूर्वक इनका सामना करने में ही समझदारी है | कठिनाइयों में ना तो दुखी होने की आवश्यकता है ना घबराने की और ना ही किसी पर दोषारोपण करने की बल्कि हर आपत्ति के बाद नए साहस और उत्साह के साथ उस परिस्थिति से जूझने और प्रतिकूलता को हटाकर अनुकूलता को उत्पन्न करने के लिए प्रयत्नशील होने की आवश्यकता है | ऐसे में मन को सतत यह विश्वास दिलाते रहे कि यह विषम समय भी बीत जाएगा |
ऐसे में ईश्वर विश्वास एक महान अवलंबन साबित होता है उसके विधान में कुछ भी अमंगल नहीं हो सकता वह सर्व समर्थ है वह विपत्ति में भी सतत हमारे साथ यह दृढ़ विश्वास ऐसी छोटी-छोटी परिस्थितियों का निर्माण करता है ऐसे सहयोग को जुटाता है |
ऐसी सोच को संभव बनाता है कि विपत्तियों को व्यक्ति धैर्य एवं साहस के साथ पार कर जाता है | ऐसे पलों में मानसिक, जाप, सुमिरन या दोस्त का पारायण बहुत सहायक सिद्ध होता है यह एक सकारात्मक मनोभूमि बनाए रखता है और नकारात्मक विचारों के विरुद्ध एक तरह से मजबूत रक्षा कवच का निर्माण करता है |
निष्कर्श
इस तरह पत्तियों से चिंतित ना हो तथा प्रत्येक परिस्थिति में आगे बढ़ते रहें अपने धैर्य को स्थिर रखते हुए सजगता बुद्धिमान की शांति और दूरदर्शिता के साथ कठिनाइयों से पार निकलने का प्रयास करे आप पाएंगे कि हर विषम परिस्थिति के बाद हम अधिक निखार के साथ अधिक सशक्त बनकर बाहर निकल रहे है बुरे दिन तो निकल जायेगे लेकिन साथ ही वे अनेको अनुभव सद्गुण सहनशक्ति एवं सूझ का वरदान देकर जायेंगे किसी ने सही कहा है कि कठिनाइयां
